धुंध और अंधेरा
धुंध और अंधेरा
कुछ धुंधला सा है जो दिखता नहीं,
कुछ है जो आंखों को तकते रहता..
कुछ धुंधली सी है मेरी कहानी,
जो मुझको भी दिखाई नहीं देती...
दुनिया की नजर से देखो,
तोह एक चकाचौंध नजर आए
अपनी नजर से देखो
तो बस इक अंधेरा,
एक धुंध सा है सामने,
शायद उसके आगे अंधेरा
मै ना जानू, वो अंधेरा होगा या उजाला
मै तो बस उस धुंध में कुछ ख्वाब ढूंढ़ते रहता
मै तो बस उस धुंध में कुछ आस बुनते रहता
हां मुझे अंधेरे से प्यार है
पर फिर भी ना जाने क्यूं
उस धुंध के आगे
सवेरे का इंतजार है।
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