कल जब ज़िंदगी हाथ बढ़ाए तो

कल जब ज़िंदगी हाथ बढ़ाए तो,
उसका दामन थाम लो ।

कल जब ज़िंदगी नजरें मिलाए तो,
अपनी आंखो से उसे बयान कर लो।

रात की रंजीशे बहुत सारी होंगी,
उसे सुबह का पैगाम बना लो।

कल जो ज़िंदगी ने सहारा दिया था,
उसको अपने जेहन में महफूज़ रखो।

कल जो ज़िंदगी के ख़्वाब संजोए थे,
उसकी ज़िद करो, बेहद करो।

तुम अभी जिंदा हो, 
अपनी सारी हसरतों को पूरा करो।

वो कहते हैं, 
ज़िंदगी का सिर्फ एक सच है मौत।

कल जब मौत हाथ बढ़ाए तो,
ज़िंदगी को दिल्लगी से रुखसत करो।।


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